शनिवार, 8 अक्टूबर 2016

अधूरी कहानियाँ बड़ी खतरनाक होती है...

अधूरी कहानियाँ बड़ी खतरनाक होती है...अधूरी कहानियों में डर की संभावनाएँ ज्यादा होती है
पात्र छटपटाते से नज़र आते है...उनके संवाद घुटते से लगने लगते है और खड़ी पाई किसी भी संवाद को उसके भाव तक नहीं पहुँचा पाती है...
चरित्र खोखले हो जाते है और संबंध बिगड़ते से प्रतीत होते है...अधूरी कहानियाँ डरावनी होती जाती है... जिस का अंत आपको मालूम ना हो वो आपको थोड़ा तो रहस्य के भीतर तक छुपाए रखता है पर उस तह तक जहाँ तक आप उसके अंत की कल्पना कर सकते हों।
अगर आप उसके और भीतर चले जाते हैं तो या तो कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह कर जी जाती है या अंत कुछ एसा उभर कर आता है कि संवेदनाओं को भी चीखने पर मजबूर कर जाता है और कुछ टुकड़ों में आपको छोड़ कर कुछ सवाल बांट जाता है
अब आप पूरी ज़िंदगी उन सवालों को ढूंढ ते रहते हैं या उन्हें पिरो पिरो कर जीवन जीने लगते हैं...अनुभव करने लगते हैं...
    - यशराज

सोमवार, 3 अक्टूबर 2016

एक चौखट है...

एक चौखट है...
जिसमें सारा परिवार रहता है...
उसी में एक देहरी है जिसमें बचपन पनपता है...
एक चौखट है...
जिस के हत्ते पे राखी बंधती है, कभी रिश्ता लड़ता है...
जिस की खरोंचों पे लंबाई मपती है
बचपन जवान होता है...
एक चौखट है...
जहाँ स्कूल से आते वक़्त बस्ता अटकता है...
जिसमें हर दोस्त यार आके मिलता है...
एक चौखट है...
जिसके पार संसार दिखता है...
जिसके अंदर महफूस समझता है...
एक चौखट है...
जिसके कोई बाहर जाता है...
जिससे कोई अंदर आता है...
एक चौखट है...
जिसमें सारा परिवार रहता है...
जिसमें एक बुढ़ापा...एक जवानी...एक बचपन
एक छोटा सा संसार दिखता है...
एक चौखट है
जो उखड़ती है तो घर मकान बनता है
एक चौखट है...
जो लगती है तो कमरा बंटता है...
जिसके तले एक कलश
किसीके पांव से छलकता है...
इस से कोई बाहर जा के नहीं आती
तो कभी कोई गए की राह तकता है
एक चौखट है
जहां मातम सिसकता है...
कभी उठावना बैठता है...
तो कभी ठोल बजते है...
कभी संगीत थिरकता है...
एक चौखट है..
जहाँ रंगोली ढ़ूलती है कभी
तो कभी दिया भी जलता है...
ये एक चौखट है...
जिसमें एक परिवार रहता है...
जिसके पार संसार दिखता है...
एक चौखट है…

                            -यशराज