अधूरी कहानियाँ बड़ी खतरनाक होती है...अधूरी कहानियों में डर की संभावनाएँ ज्यादा होती है
पात्र छटपटाते से नज़र आते है...उनके संवाद घुटते से लगने लगते है और खड़ी पाई किसी भी संवाद को उसके भाव तक नहीं पहुँचा पाती है...
चरित्र खोखले हो जाते है और संबंध बिगड़ते से प्रतीत होते है...अधूरी कहानियाँ डरावनी होती जाती है... जिस का अंत आपको मालूम ना हो वो आपको थोड़ा तो रहस्य के भीतर तक छुपाए रखता है पर उस तह तक जहाँ तक आप उसके अंत की कल्पना कर सकते हों।
अगर आप उसके और भीतर चले जाते हैं तो या तो कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह कर जी जाती है या अंत कुछ एसा उभर कर आता है कि संवेदनाओं को भी चीखने पर मजबूर कर जाता है और कुछ टुकड़ों में आपको छोड़ कर कुछ सवाल बांट जाता है
अब आप पूरी ज़िंदगी उन सवालों को ढूंढ ते रहते हैं या उन्हें पिरो पिरो कर जीवन जीने लगते हैं...अनुभव करने लगते हैं...
- यशराज
पात्र छटपटाते से नज़र आते है...उनके संवाद घुटते से लगने लगते है और खड़ी पाई किसी भी संवाद को उसके भाव तक नहीं पहुँचा पाती है...
चरित्र खोखले हो जाते है और संबंध बिगड़ते से प्रतीत होते है...अधूरी कहानियाँ डरावनी होती जाती है... जिस का अंत आपको मालूम ना हो वो आपको थोड़ा तो रहस्य के भीतर तक छुपाए रखता है पर उस तह तक जहाँ तक आप उसके अंत की कल्पना कर सकते हों।
अगर आप उसके और भीतर चले जाते हैं तो या तो कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह कर जी जाती है या अंत कुछ एसा उभर कर आता है कि संवेदनाओं को भी चीखने पर मजबूर कर जाता है और कुछ टुकड़ों में आपको छोड़ कर कुछ सवाल बांट जाता है
अब आप पूरी ज़िंदगी उन सवालों को ढूंढ ते रहते हैं या उन्हें पिरो पिरो कर जीवन जीने लगते हैं...अनुभव करने लगते हैं...
- यशराज
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें